खोज: एक अंतर्यात्रा — अनु चंद्रशेखर
कुछ एहसास कहे नहीं जाते — बस महसूस किए जाते हैं।
खोज: एक अंतर्यात्रा — अनु चंद्रशेखर

कुछ एहसास कहे नहीं जाते — बस महसूस किए जाते हैं।
ऐसी सुबहें होती हैं जब दुनिया बंद दरवाज़ों की एक श्रृंखला जैसी लगती है। कोई संकट नहीं — बस दैनिक जीवन का वह चुप्पा बोझ जो धीरे-धीरे हड्डियों में बैठ जाता है। जब रास्ता दिखता है, पर चलना कठिन हो जाता है। जब मन खुद से अपरिचित हो उठता है।
यह कविता ऐसी ही एक सुबह से उभरी। एक सैर के बाद का शांत ठहराव — जब दुनिया का शोर पीछे हट गया और भीतर कुछ बोला।
तब समझ आया कि जो बेचैनी मैं ढो रही थी, वह खो जाने का संकेत नहीं थी। वह एक यात्रा का अनाम संगीत था — जो अभी भी जारी है।
जो खोज में आनंद है, वही अंधेरे में निस्पंद है।
मिटने और बनने के बीच एक शांत विस्तार होता है। यह कविता उसी जगह से है — किसी जवाब की तरह नहीं, बल्कि एक साथी की तरह — उन सबके लिए जो अभी भी खोज में हैं।
शायद आपके जीवन के किसी शांत कोने में, यह खोज आपकी भी है।
👉 पूरी कविता, प्रस्तावना और कवि की टिप्पणी के साथ पढ़िए अभिव्यक्त अनुभूति पर: [link]
메타데이터
- post_id
- c2cb374c5ea3
- slug
- खोज-एक-अंतर्यात्रा-अनु-चंद्रशेखर-c2cb374c5ea3
- url
- https://medium.com/@canu5794/%E0%A4%96%E0%A5%8B%E0%A4%9C-%E0%A4%8F%E0%A4%95-%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81-%E0%A4%9A%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B6%E0%A5%87%E0%A4%96%E0%A4%B0-c2cb374c5ea3
- canonical_url
- https://medium.com/@canu5794/%E0%A4%96%E0%A5%8B%E0%A4%9C-%E0%A4%8F%E0%A4%95-%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81-%E0%A4%9A%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B6%E0%A5%87%E0%A4%96%E0%A4%B0-c2cb374c5ea3
- author_url
- https://medium.com/@canu5794
- status
- ok
- fetched_at
- 2026-06-17 14:06:56