धर्मेंद्र को ‘ही-मैन’ नाम किसने दिया, पंजाब के खेतों से मुंबई की चमकती रोशनी तक का सफर
“बसंती इन कुत्तो के सामने मत नाचना… अगर TO टू होता है, तो GO गू क्यों नहीं होता…गांव वालों, तुमको मेरा आख़िरी सलाम… गुडबाय…” ये डायलॉग कहने…
धर्मेंद्र को ‘ही-मैन’ नाम किसने दिया, पंजाब के खेतों से मुंबई की चमकती रोशनी तक का सफर

“बसंती इन कुत्तो के सामने मत नाचना… अगर TO टू होता है, तो GO गू क्यों नहीं होता…गांव वालों, तुमको मेरा आख़िरी सलाम… गुडबाय…” ये डायलॉग कहने वाले ने हमेशा के लिए दुनिया को गुडबाय कह दिया। 8 दिसंबर 1935 को पंजाब के एक छोटे से गांव नसराली में जन्मे धर्म सिंह देओल ने शायद कभी नहीं सोचा होगा कि एक दिन वह बॉलीवुड के सबसे बड़े सुपरस्टार बनेंगे।
एक स्कूल हेडमास्टर के बेटे ने जब पहली बार सिनेमा देखा, तो उनके दिल में फिल्मों के प्रति प्यार जागा। लेकिन उस समय किसी को नहीं पता था कि यह साधारण सा लड़का एक दिन भारतीय सिनेमा का चेहरा बन जाएगा। और आज, 24 नवंबर 2025 को 89 वर्ष की आयु में उनके निधन के साथ, हिंदी सिनेमा का एक सुनहरा अध्याय बंद हो गया।
फिल्मी सफर की शुरुआत: संघर्ष से सफलता तक
धर्मेंद्र की फिल्मी दुनिया में एंट्री कोई आसान नहीं थी। 1958 में फिल्मफेयर पत्रिका द्वारा आयोजित एक प्रतिभा खोज प्रतियोगिता में उन्होंने हिस्सा लिया और जीत हासिल की। यह जीत उनके लिए मुंबई के दरवाजे खोलने वाली साबित हुई। लेकिन मुंबई आना और फिल्मों में काम पाना दो अलग बातें थीं।
शुरुआती दिनों में उन्हें कड़ा संघर्ष करना पड़ा। छोटे किराए के कमरों में रहना, कभी-कभी भूखे पेट सोना, और स्टूडियो के बाहर घंटों इंतजार करना, यह सब धर्मेंद्र की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा था। उनके दोस्त मनोज कुमार ने एक बार उन्हें वापस पंजाब जाने से रोका था, और अच्छा हुआ कि रोक लिया, वरना हिंदी सिनेमा अपने सबसे महान अभिनेता से वंचित रह जाता।
1960 में अर्जुन हिंगोरानी की फिल्म ‘दिल भी तेरा हम भी तेरे’ से उनका बॉलीवुड डेब्यू हुआ। पहली फिल्म के लिए उन्हें सिर्फ 51 रुपये मिले थे, तीन फिल्मकारों ने 17–17 रुपये दिए थे। यह राशि पाकर उन्होंने एक रोडसाइड ढाबे पर अपने दोस्तों को पार्टी दी थी। पहली फिल्म असफल रही, लेकिन धर्मेंद्र ने हार नहीं मानी।
पहली हिट और ‘ही-मैन’ का जन्म
धर्मेंद्र की पहली व्यावसायिक सफलता 1961 में ‘शोला और शबनम’ से मिली। लेकिन असली ब्रेकथ्रू 1966 में ओ.पी. रल्हन की फिल्म ‘फूल और पत्थर’ से आया। मीना कुमारी के साथ बनी इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा दिया।
इस फिल्म में एक दृश्य था जिसने धर्मेंद्र के करियर की दिशा ही बदल दी, वह दृश्य जहां वे पहली बार बिना कमीज के नजर आए। उस दौर के हिसाब से यह बहुत बड़ी बात थी। उनकी मजबूत काया, आत्मविश्वास और एक्शन सीन्स ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसी फिल्म के बाद उन्हें ‘बॉलीवुड का ही-मैन’ का खिताब मिला। फैंस और मीडिया ने उन्हें इस नाम से नवाजा था।
‘ही-मैन’ शब्द अंग्रेजी से आया है, जिसका मतलब है, वह पुरुष जो शारीरिक रूप से मजबूत, बहादुर, आत्मविश्वासी और भावनात्मक रूप से संतुलित हो। धर्मेंद्र इन सभी गुणों का जीता-जागता उदाहरण थे। उनकी फिल्मों में दिखने वाली मर्दानगी असली थी, दिखावटी नहीं, वे अपने स्टंट खुद करते थे, और साथ ही अपनी भावनात्मक अदाकारी से दर्शकों के दिल जीत लेते थे।
सुनहरा दौर और ‘शोले’ का जादू
1970 के दशक का आरंभ धर्मेंद्र के करियर का स्वर्णिम काल था। 1971 में राज खोसला की फिल्म ‘मेरा गांव मेरा देश’ ने सिनेमाघरों में तूफान मचा दिया। यह फिल्म ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर साबित हुई और धर्मेंद्र को एक्शन हीरो के रूप में स्थापित कर दिया। इस फिल्म की सफलता ने पूरे बॉलीवुड को रोमांटिक फिल्मों से एक्शन फिल्मों की ओर मोड़ दिया।
1973 धर्मेंद्र के करियर का सबसे शानदार साल था, उस साल उनकी दो ब्लॉकबस्टर, दो सुपरहिट और दो हिट फिल्में आईं। फिल्में मिलाकर उनके खाते में आठ सफल फिल्में थीं।
लेकिन असली चमत्कार तो 1975 में आया, रमेश सिप्पी की ‘शोले’। इस फिल्म की कहानी भी दिलचस्प है। शुरू में धर्मेंद्र ठाकुर का किरदार करना चाहते थे, क्योंकि उन्हें लगा कि पूरी कहानी ठाकुर की है। लेकिन सिप्पी ने उन्हें समझाया कि अगर वे ठाकुर बनेंगे, तो संजीव कुमार वीरू बनेंगे और हेमा मालिनी के साथ रोमांस करेंगे। धर्मेंद्र उस समय हेमा से प्यार करते थे, और संजीव कुमार भी हेमा को पसंद करते थे। यह सुनकर धर्मेंद्र ने तुरंत वीरू का रोल चुन लिया!
‘शोले’ के सेट पर धर्मेंद्र अक्सर लाइट बॉयज को पैसे देते थे ताकि वे शॉट खराब कर दें, और उन्हें हेमा के साथ ज्यादा रीटेक करने का मौका मिले। यह उनके प्यार की गहराई बताता है।
‘शोले’ ने धर्मेंद्र की जिंदगी बदल दी। यह फिल्म 19 साल तक सबसे ज्यादा कमाई करने वाली हिंदी फिल्म रही। वीरू का किरदार आज भी हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार किरदारों में गिना जाता है। दिलचस्प बात यह है कि शुरू में ‘शोले’ को धर्मेंद्र की फिल्म के तौर पर प्रमोट किया गया था और उन्हें अमिताभ बच्चन से ज्यादा फीस भी मिली थी, क्योंकि उस समय वे बच्चन से बड़े स्टार थे।
फिल्मी करियर: आंकड़ों की कहानी
धर्मेंद्र ने अपने 65 साल के करियर में 300 से अधिक फिल्मों में काम किया। उनके खाते में:
**- 6 ब्लॉकबस्टर फिल्में
- 7 सुपरहिट फिल्में
- 36 हिट फिल्में
- कुल मिलाकर लगभग 93 सफल फिल्में (औसत या उससे ऊपर)**
यह हिंदी सिनेमा के इतिहास में सबसे ज्यादा हिट फिल्मों का रिकॉर्ड है। उनकी कुछ यादगार फिल्में हैं, ‘शोले’, ‘चुपके चुपके’, ‘धरम वीर’, ‘सीता और गीता’, ‘जुगनू’, ‘मेरा गांव मेरा देश’, ‘आंखें’, ‘सत्यकाम’, ‘बंदिनी’, ‘अनुपमा’, ‘हुकूमत’ और कई अन्य।
हालांकि, यह भी सच है कि धर्मेंद्र के करियर में लगभग 180 फिल्में फ्लॉप रहीं। 1990 के दशक में जब खान त्रिकोण (शाहरुख, आमिर और सलमान) ने उभरना शुरू किया, तो धर्मेंद्र ने कई बी-ग्रेड एक्शन फिल्मों में काम किया। हालांकि ये फिल्में मुख्यधारा में नहीं चलीं, लेकिन छोटे शहरों और गांवों में उनके दर्शक थे जो पुराने जमाने के एक्शन हीरो को देखना चाहते थे।
बता दें कि हिंदी सिनेमा में उनके योगदान के लिए धर्मेंद्र को 2012 में पद्म भूषण पुरस्कार, 2004 में भारतीय सिनेमा में सर्वश्रेष्ठ योगदान के लिए पुरस्कार और 1997 में फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
राजनीतिक पारी
2004 में धर्मेंद्र ने राजनीति में कदम रखा। वे भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर राजस्थान के बीकानेर से लोकसभा सांसद चुने गए। हालांकि राजनीति में उनका योगदान सीमित रहा, और वे जल्द ही अभिनय में वापस लौट आए।
प्रेम कहानी और विवाद
धर्मेंद्र के व्यक्तिगत जीवन ने हमेशा सुर्खियां बटोरीं। 1954 में 19 साल की उम्र में उनकी शादी प्रकाश कौर से हुई थी, फिल्मी करियर शुरू करने से पहले। यह पारंपरिक पंजाबी परिवार की अरेंज्ड मैरिज थी। इस शादी से उन्हें चार बच्चे हुए, सनी देओल, बॉबी देओल, विजयता और अजीता।
लेकिन 1970 में जब उन्होंने हेमा मालिनी के साथ ‘तुम हसीन मैं जवां’ में काम किया, तो दोनों के बीच प्यार हो गया। दोनों ने कई फिल्मों में साथ काम किया और उनकी ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री दर्शकों को पसंद आई। 1980 में धर्मेंद्र ने प्रकाश कौर से तलाक लिए बिना हेमा से शादी कर ली।
इस शादी ने बड़ा विवाद खड़ा किया। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि दोनों ने इस्लाम धर्म अपना लिया था (दिलावर खान और आयशा बी नाम रखे), क्योंकि इस्लामिक कानून के तहत एक पुरुष दूसरी शादी कर सकता है। हालांकि, 2004 में धर्मेंद्र ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया और कहा कि वे हिंदू ही रहे।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि प्रकाश कौर ने हमेशा धर्मेंद्र का साथ दिया। 1981 में स्टारडस्ट को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, “मेरे पति को ही क्यों, कोई भी पुरुष मेरे मुकाबले हेमा को चुनता। आधी इंडस्ट्री यही कर रही है, तो सिर्फ मेरे पति को ही दोष क्यों?” उन्होंने यह भी कहा कि धर्मेंद्र शायद सबसे अच्छे पति न हों, लेकिन सबसे अच्छे पिता जरूर हैं।
हेमा मालिनी के साथ धर्मेंद्र की दो बेटियां हुईं, ईशा देओल और अहाना देओल। दिलचस्प बात यह है कि धर्मेंद्र और हेमा कभी साथ नहीं रहे। हेमा अपनी बेटियों के साथ अलग रहीं, लेकिन उनके और धर्मेंद्र के बीच का प्यार और सम्मान कभी कम नहीं हुआ। हाल के वर्षों में रिपोर्ट्स के मुताबिक, धर्मेंद्र अपनी पहली पत्नी प्रकाश कौर के साथ खंडाला के फार्महाउस में रह रहे थे।
विरासत जो अमर है
धर्मेंद्र की विरासत सिर्फ उनकी फिल्मों में नहीं, बल्कि उनके परिवार में भी जीवित है। उनके बेटे सनी देओल और बॉबी देओल सफल अभिनेता हैं। बेटियां ईशा और अहाना भी फिल्मों से जुड़ी रहीं। पोते करण देओल भी अभिनय कर रहे हैं।
1997 में उन्हें फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड मिला। उस समय उन्होंने दुख जताया था कि 37 साल तक वे हर साल नया सूट सिलवाते रहे कि शायद अवॉर्ड मिल जाए, लेकिन कभी नहीं मिला। 2012 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया।
एक युग का अंत
आज जब धर्मेंद्र हमें छोड़कर चले गए हैं, तो हिंदी सिनेमा का एक सुनहरा अध्याय बंद हो गया है। वे सिर्फ एक अभिनेता नहीं थे, वे एक संस्था थे, एक घटना थे। पंजाब के एक साधारण गांव से निकलकर बॉलीवुड के सबसे बड़े सुपरस्टार बनने का सफर आसान नहीं था, लेकिन धर्मेंद्र ने अपनी मेहनत, प्रतिभा और विनम्रता से यह हासिल किया।
उनकी फिल्में पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी। वीरू का किरदार हमेशा याद किया जाएगा। उनकी मुस्कान, उनकी आंखों में झलकता विश्वास, और उनका अनोखा अंदाज, ये सब हमेशा हिंदी सिनेमा की अमर विरासत रहेंगे।
धर्मेंद्र ने साबित कर दिया कि सच्चा हीरो वही है जो स्क्रीन पर ताकत दिखाने के साथ-साथ दिल से भी मजबूत हो। वे बॉलीवुड के असली ‘ही-मैन’ थे, हैं और हमेशा रहेंगे।
अंत में शोले फिल्म के गाने की ये लाइन हमेशा धर्म जी की याद दिलाएगी।
“तूने ये क्या किया, बेवफा बन गया, वादा तोड़ के, चल दिया इस तरह, राहों में तू मुझे, पीछे छोड़के… आगे तू निकल गया, साथी तू बदल गया…. तोड़ी दोस्ती, ये दोस्ती.. हम नहीं तोड़ेंगे, तोड़ेंगे दम मगर, तेरा साथ ना…:”
메타데이터
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- 2026-07-07 21:14:12