जब लालू यादव को पाकिस्तान का रेल मंत्री बनाने की बात उठी
आवाज़ एक बहुत बेहतरीन कला है। आप एक आवाज़ पर दंगे भड़का सकते हैं, उसी आवाज़ से आप सुरीले गाने गा सकते हैं, क्रोध ज़ाहिर कर सकते हैं और इसी आवाज़…
जब लालू यादव को पाकिस्तान का रेल मंत्री बनाने की बात उठी

आवाज़ एक बहुत बेहतरीन कला है। आप एक आवाज़ पर दंगे भड़का सकते हैं, उसी आवाज़ से आप सुरीले गाने गा सकते हैं, क्रोध ज़ाहिर कर सकते हैं और इसी आवाज़ के दम पर आप लोगों को मोहित भी कर सकते हैं। राजनीति में ये आवाज़ ही सबसे बड़ा हथियार होता है, ताकि लोगों को मोहित किया जा सके, या यूँ कहें जाल में फांसा जा सके। इतिहास पर गौर करें पंडित नेहरू, इंदिरा गाँधी, अटल बिहारी वाजपेयी या वर्तमान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।
इन सब में आवाज़ की बड़ी खासियत है। ये सभी अपनी आवाज़ के दम पर लोगों के बीच लोकप्रिय हुए। इसे आप समा बांधना भी कह सकते हैं और राजनीतिक जाल में फांसना भी कह सकते हैं। इन सबके बीच एक और ऐसा नेता है, जो अपनी आवाज़ के दम पर काफी लोकप्रिय हुआ, जो विधायक, मुख्यमंत्री का सफर तय करते हुए, भारत की संसद में पहुंचा।
यहाँ बात लालू प्रसाद यादव की हो रही है। वो लालू जिनको लेकर एक मशहूर स्लोगन था, ‘जब ले रही समोसा में आलू, तब ले बिहार में रही लालू।’ ये वही लालू हैं जिन्हें एक बार पाकिस्तान का रेल मंत्री बनाने की बात उठी थी। क्या है वो मजेदार किस्सा, इसे आज समझेंगे।
क्यों पाकिस्तान गए थे लालू यादव?
भारत की राजनीति में लालू प्रसाद यादव हमेशा से अपने हाजिरजवाबी, देसी अंदाज़ और जनता से जुड़ाव के लिए जाने जाते रहे हैं लेकिन 2003 का उनका पाकिस्तान दौरा केवल एक राजनीतिक घटना नहीं था, बल्कि दोनों देशों के बीच रिश्तों की एक अनोखी कड़ी भी बना। इस दौरे में भारत के सभी सांसद थे, जिनमें लालू यादव भी थे।
सभी सांसद शताब्दी एक्सप्रेस से अमृतसर तक गए और वहां बॉर्डर पार करके पाकिस्तान। सभी सांसद के वहां जाने के बाद सबका जोरदार स्वागत हुआ लेकिन लालू यादव का वहां स्वैग अलग था। पत्रकार से लेकर वहां के सांसद तक लालू यादव से मुखातिब होना चाहते थे।
लालू यादव अगस्त 2003 में एक “गुडविल टीम” (सद्भावना प्रतिनिधिमंडल) के हिस्से के रूप में पाकिस्तान गए थे। इस यात्रा का आयोजन South Asian Free Media Association ने किया था। इसका मकसद था कि भारत और पाकिस्तान के बीच संवाद और आपसी समझ बढ़े, और दोनों देशों के लोग एक-दूसरे को करीब से जान सकें।
उस समय भारत-पाकिस्तान संबंध तनावपूर्ण थे। ऐसे में नेताओं, पत्रकारों और समाजसेवियों का एक समूह पाकिस्तान गया। लालू यादव को भी इस प्रतिनिधिमंडल में शामिल किया गया। लेकिन उनकी मुश्किल यह थी कि उस समय वे चारा घोटाला मामले में अभियुक्त थे। इसीलिए सुप्रीम कोर्ट पहले उन्हें बाहर जाने की इजाज़त नहीं दे रही थी। बाद में विशेष अनुमति दी गई और लालू यादव को दौरे में शामिल होने का मौका मिला।
पाकिस्तान में लालू यादव कहाँ-कहाँ गए?
लालू यादव का दौरा पाकिस्तान के कई शहरों तक फैला। वहां लालू वो बादशाही मस्जिद में गए थे, तो वहां के एक पाकिस्तानी सांसद ने उन्हें बताया कि इस मस्जिद की बनावट ऐसी है कि आवाज़ गूंजती है। फिर क्या था सब सब शांत हो गए तो लालू जोर से चिल्लाए, अल्लाह हु अकबर। सारे लोग लालू की इस हरकत से दंग रह गए कि वो क्या कर रहे हैं।
एक किस्सा और है कि अल्लामा मुहम्मद इक़बाल की मजार पर भी गए जहाँ लोग दुआ कर रहे थे। लालू ने भी अपने हाथों को चेहरे की ओर करके दुआ करने लगे। आँखें बंद की और फिर हाथ को सर पर फेर लिया। वहां मौजूद पत्रकारों ने पूछा कि क्या अल्लामा इक़बाल को भारत में लोग जानते हैं क्या? लालू तपाक से बोले, बच्चा-बच्चा जानता है।
वहीं, बाबरी मस्जिद को लेकर जब उनसे सवाल हुआ कि आप यहाँ मस्जिद में घूम रहे हैं और वहां बाबरी मस्जिद गिरा दी गई। इसपर भी लालू ने जवाब दिया कि शरारती तत्व तो हर जगह होते हैं, उन्हें खुदा दंड देंगे।
लालू यादव का अंदाज़ इतना सहज और मज़ेदार था कि औपचारिक माहौल भी हल्का हो गया।
मुशर्रफ से मुलाकात और रेल मंत्री बनने की बात
पाकिस्तान में लालू यादव वहां के तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ से भी मिले। मुशर्रफ ने लालू से कहा कि आप तो मेरे मुल्क में खूब हिट हो गए हैं। इस दौरान का एक किस्सा और है कि एक भारतीय पत्रकार ने मुशर्रफ से कहा कि बीते दिनों मौलाना फजलुल रहमान भारत गए थे और अब लालू यहाँ पाकिस्तान आए हैं।
तो मुशर्रफ ने कहा कि आप रहमान को 6 महीने भारत में रख लीजिये और हम 6 महीने के लिए लालू को पकिस्तान में रख लेते हैं। मुशर्रफ लालू की लोकप्रियता से इतने हैरान थे कि उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि अगर आप यहाँ से यानी पाकिस्तान से चुनाव लड़ लें, तो जीत जाएंगे।
इतना ही नहीं पाकिस्तान के सांसद सज़्ज़ाद अहमद ने यहाँ तक कह दिया था कि अगर पाकिस्तानी नेता रेल मंत्रालय नहीं संभाल पा रहे हैं, तो लालू को इसकी जिम्मेदारी दे देनी चाहिए। वो भारत की तरह यहाँ भी फायदा करा देंगे।
पाक आवाम के बीच लोकप्रियता
पाकिस्तान की जनता के बीच लालू यादव अचानक चर्चा का विषय बन गए। लालू एक दिन अचानक सुबह उठे और लाल हवेली चले गए। रावलपिंडी जब पहुंचे तो वहां लालू को देखने के लिए हुजूम इकठ्ठा हो गया। भीड़ इतनी थी कि ट्रैफिक लग गया।
इसके बाद लालू ने वहां के तल्कालिन इनफार्मेशन एंड ब्रॉडकास्टिंग मिनिस्टर शेख रशीद को बुलावा भेजा। वो जिम कर रहे थे, खबर मिलते ही तुरंत भागे। दोनों काफी देर तक लाल हवेली की सीढ़ियों पर बैठकर बात किये और फिर आस पास की सब्जी मंडियों के विक्रेताओं से भी मिले। पाकिस्तान के मीडिया ने भी उन्हें खूब कवरेज दी।
सत्तू वाला किस्सा
लालू यादव का पाकिस्तान दौरे का एक और मजेदार किस्सा “सत्तू” से जुड़ा है। वे अपने साथ एक डब्बे में सत्तू लेकर गए थे। सत्तू बिहार का पारंपरिक और पौष्टिक आहार है। वहां पर वो एक होटल में रुके थे जहाँ GEO न्यूज के पत्रकार शोहेल उनका इंटरव्यू सुबह-सुबह लेने के लिए पहुंचे थे। लालू ने उन्हें कहा. “ थोड़ा रुकिए नाश्ता करके बात करते हैं।”
इसके बाद लालू ने एक टिफिन से सत्तू निकाला और उसमे पानी मिलाया और उसे शान कर यानी गूथकर खाने लगे। साथ में मिर्च भी थी। पत्रकार ने उनसे पूरा क्या आप होटल का खाना नहीं खाते हैं। इसपर लालू बोले, “गोली मारो होटल के खाने को, गांव के खाने में जो मजा है, वो कहीं और नहीं है। इससे बीमारी भी नहीं होता है।”
यह बात भी पाकिस्तान की जनता और मीडिया को खूब भायी। यह छोटा-सा डब्बा उनके देसी स्वभाव और जड़ों से जुड़े रहने का प्रतीक बन गया।
अंत में…
लालू यादव का पाकिस्तान दौरा केवल एक कूटनीतिक या राजनीतिक यात्रा नहीं था। यह दौरा एक ऐसे भारतीय नेता का किस्सा था, जिसने अपनी सादगी, ह्यूमर और देसी अंदाज़ से सीमा के उस पार भी लोगों को हंसाया और उनका दिल जीता। जहाँ आमतौर पर ऐसे दौरे औपचारिक भाषणों और बयानों तक सीमित रहते हैं, वहीं लालू यादव ने दिखाया कि जनता का दिल जीतने के लिए सरलता और हंसी सबसे बड़ा हथियार है।
आज जब हम उस यात्रा को याद करते हैं, तो यह साबित होता है कि राजनीति केवल सत्ता या विरोध की बात नहीं, बल्कि लोगों के बीच रिश्ते बनाने और दूरी मिटाने का जरिया भी हो सकती है। लालू यादव पर चारा घोटाले से लेकर कई तरह के इल्ज़ाम हैं। कोर्ट में ये मामला अब तक चल रहा है और वो दोषी करार भी दिए गए हैं लेकिन लालू से एक चीज जो सीखने वाली है, वो है आवाज़ की कला, जिसके दम पर उन्होंने राजनीति में ऐसी पहचान बनाई कि चर्चा पाकिस्तान तक हो गई।
메타데이터
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