A Melodious Return to the Self
आएं अनुभव करें आत्मा दर्शन करें अपने पाँचों स्वरूपों का चिंतन करें
A Melodious Return to the Self
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आएं अनुभव करें आत्मा दर्शन करें अपने पाँचों स्वरूपों का चिंतन करें
अनादि रूप रचकर तन भान तजकर परमधाम चल दें स्मृतियों से सजकर प्रभु पास आकर, किरण में नहाकर उनसा बनें यादों में हम समाकर स्नेह से कल्पतरु का सिंचन करें आएं अनुभव करें आत्मा दर्शन करें अपने पाँचों स्वरूपों का चिंतन करें
नए रूप उतरे जो संपूर्ण पावन अपनी ये दुनिया स्वर्गिक सुहावन अपने धरती गगन मंद पावन पवन नाथ त्रिभुवन के हम लेते थे सुख सघन आदि रूप आँखों में अभिनंदन करें आएं अनुभव करें आत्मा दर्शन करें अपने पाँचों स्वरूपों का चिंतन करें
देखें द्वापर में मंदिर में पूजा हुई पूज्य हम ही तो थे वो ना दूजा कोई हो कतारों में करबद्ध करते नमन करते पूर्ण कामना भक्तवत्सल नयन कितनी श्रद्धा से वो भक्ति पूजन करें आएं अनुभव करें आत्मा दर्शन करें अपने पाँचों स्वरूपों का चिंतन करें
चलते चलते काल चक्र जो पूरा हुआ संगम में अपनों से संगम हुआ भाग्य द्वार खुले हमको भगवान मिले लग के प्रभु के गले भाग्य लिखने लगे ब्रह्मवंशी ब्राह्मण ज्ञान गुंजन करें आएं अनुभव करें आत्मा दर्शन करें अपने पाँचों स्वरूपों का चिंतन करें
कर तपस्या विदेही फरिश्ता हुए शक्ति भरते प्रभु सेवा करते हुए करके पावन प्रकृति विश्व बदलेंगे हम अपसा बाबा बन तन से निकलेंगे हम धुन है आपके कथन पे खुद को अर्पण करें आएं अनुभव करें आत्मा दर्शन करें अपने पाँचों स्वरूपों का चिंतन करें।
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- 2026-06-27 08:54:08