भारतीय कृषि बाजार और ई-मंडियों से क्या अपेक्षा करें
जब 1947 में अंग्रेजों ने भारत छोड़ दिया तो हमें उनसे जो विरासत में मिला वह कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था थी, जिसमें खेती और उससे जुड़े क्षेत्रों…
भारतीय कृषि बाजार और ई-मंडियों से क्या अपेक्षा करें

जब 1947 में अंग्रेजों ने भारत छोड़ दिया तो हमें उनसे जो विरासत में मिला वह कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था थी, जिसमें खेती और उससे जुड़े क्षेत्रों ने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में बड़ा योगदान दिया और बदले में आबादी के एक बड़े भाग को रोजगार मिला। 1960 के दशक के मध्य में भारत ने खाद्य की कमी के संकट का सामना किया, जिसके कारण कृषि नीति के प्रति मजबूत सुधारों को अपनाया गया, जो पूरी तरह से खाद्य आत्मनिर्भरता प्राप्त करने, खेती उत्पादन को बढ़ावा देने और पद्धतियों को आधुनिक बनाने पर केंद्रित था। इनमें से कुछ नीतियों में भूमि सुधार, कृषि प्रशासनिक व्यवस्था में संरचनात्मक बदलाव, विस्तार योजनाएँ, प्रमुख कृषि उपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की शुरूआत सहित मूल्य समर्थन नीतियों की शुरूआत, नई तकनीकों को लाना (जो हरित क्रांति के रूप में लोकप्रिय है), कृषि अनुसंधान को मजबूत करना, आदि शामिल हैं।
केंद्र सरकार देश भर में भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) और राज्य एजेंसियों के माध्यम से मूल्य समर्थन देती है क्योंकि उनकी खरीद नीति की कोई पूर्व निर्धारित सीमा नहीं है। किसानों से एमएसपी पर फसलों की खरीद की जाती है और अगर किसानों को लगता है कि वे कहीं और बेच कर बेहतर कीमत प्राप्त करने में सक्षम हैं, तो वे इसे बेचने के लिए स्वतंत्र हैं, क्योंकि खरीदने वाली एजेंसी का मुख्य उद्देश्य किसानों को उनकी उपज के लिए पारिश्रमिक मूल्य देना है ताकि उन्हें मजबूरन बिक्री का सहारा नहीं लेना पड़े।
किसानों के हितों को सबसे पहले ध्यान में रखते हुए वर्ष 2016 में कृषि मंत्रालय ने भारत में कृषि वस्तुओं के लिए एक ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के रूप में राष्ट्रीय कृषि बाजार या ई-नाम शुरू किया था और इसने कई और ई-मंडियों के निर्माण को जन्म दिया।
उनमें से एक **एग्रीबाजार है, सब काम एक ही जगह पर करने के लिए (वन-स्टॉप) एग्रीटेक प्लेटफॉर्म, जो भारतीय कृषि को आकार देने के लिए भविष्य के लिए तैयार समाधान देने के लिए एक बुद्धिमान और सहज प्रणाली है। जो अत्याधुनिक तकनीक और साधन से खंडित कृषि व्यवसायों की निर्भरता, संगतता और सुस्थिरता सुनिश्चित करते हैं। सटीक खेती, भंडारण, एग्री-ट्रेडिंग और वित्त व भुगतान, जैसी सेवाओं के साथ एग्रीबाजार भौगोलिक क्षेत्रों में फैला है और पूरे कृषि पारिस्थितिकी तंत्र की क्षमता को बढ़ा रहा है। यह पूरे भारत में हजारों भारतीय किसानों को जोड़ता है। यह कृषि, ऑनलाइन मार्केटप्लेस, नीलामी, मार्केटप्लेस, ग्रामीण (रूरल) ई-कॉमर्स, एग्री ट्रेडिंग, एग्रीटेक, सटीक (प्रिसिजन) कृषि, भंडारण, खरीद, ई-मंडी, एग्री-फाइनेंस, एग्री-इंश्योरेंस, और संपार्शि्वक प्रबंधन (कोलेटरल मैनेजमेंट) में माहिर है। ये ई-मंडियां किसानों, **व्यापारियों और खरीदारों को वस्तुओं में ऑनलाइन ट्रेडिंग सुविधाओं को सक्षम करने में मदद करती हैं और किसानों को बेहतर मूल्य की खोज करने में मदद करती हैं और उनकी उपज की बाधा रहित मार्केटिंग के लिए सुविधाएं प्रदान करती हैं।
메타데이터
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