गुपचुप
समाज में अमीर और गरीब हर अमीर और गरीब शहरों में होता है। कहीं का अमीर कहीं का गरीब हो जाता है। ऐसा ही एक शहर है रायगढ़ , छोटा है। एक…
गुपचुप
समाज में अमीर और गरीब हर अमीर और गरीब शहरों में होता है। कहीं का अमीर कहीं का गरीब हो जाता है। ऐसा ही एक शहर है रायगढ़ , छोटा है। एक तमीज़दार गुपचुप वाला है जो “बड़े भाई” कहकर संबोधित करता है सबको। उसके यहाँ आज खाने चला गया। साथ में ६ लड़किया जिनमे एक महिला और २ उनकी बेटी थी जो दिखने से पता चलरहा था की कम पूँजीधारी लोग है। वो साफ़ नहीं थे और बच्चों में सहूर नहीं था, छोटी बच्ची जो क्रिकेट स्टंप में दो गिल्ली जोड़ दो लंबाई में उतनी थी और फ्रॉक उठा के नाक पोछने लगी। अक्सर इतना उन घरों में सीखा देते है जहाँ पूजा पाठ और साफ़ सफाई रहती है। पर ये वहाँ से नहीं आती थी, खाते समय दोने से खट्टा पानी बहे जराहा था पर उसे उससे कोई मतलब नहीं था। गंदे कपड़े, अनबने बाल, सूखी चमड़ी , मुंह से टपकता थूक और खाने के बाद गंदे ड्रम से पानी लेना और मग्गा जूठा करके पिलाती हुई उनकी माँ। हा रफ़्तार में बस खाये जा रही थीं क्युकी ग़रीब अक्सर जल्दी खाता है। गुपचुप में कोई बदलाव नहीं करवाया क्युकी उन्हें जो मिलरहा है वही फटाफट ले लेने में चतुराई नजर आती है।
बदलाव तो बगल की टीशर्ट और जीन्स पहनी तीन लड़किया जिनके बाल खुले और गोल चश्मे लगे थे वो करवा रही थीं। तीनो एक ही स्कूटी में आई थी। “भैया मेरे में नमक, तीखा और खट्टा ज़्यादा” उनमे से सबसे वज़नदार लड़की ने कहा। और बड़े भाई ने सब बढ़ा दिया जिससे मुझे तकलीफ़ हुई क्युकी सबने तो नहीं कहा था, फिर २ और गिल्ली स्टंप में बढ़ा दो उतनी उचाई वाली एक ने कहा नामक और ज़्यादा। बड़े भाई ने फिर आदेश का पालन किया। बड़े भाई को एक बड़ा वाला लगाने का मन हुआ पर २०₹ के गुपचुप के लिए कोई जितना जूझे। १ खाते ही, २ गिल्ली लंबी लड़की बोली “बस मेरा हो गया”। इस तपके की लड़किया बड़ी स्वार्थी मालूम पड़ती है। अपने एक गुपचुप के लिए उसने सबका स्वाद नमकीन करवा दिया। वजनवीर आख़िर तक लड़ी। तीसरी कौन सी थी भूल गया क्युकी अक्सर इनके पहनावे, टीशर्ट जीन्स खुले बाल और चश्मे की वजह से ये एक सी दिखती है। मैंने भी अपना पेमेंट किया और दोबारा इस ठेले में ना आने का फैसला लेके वहा से अपनी मीटियार ३६० चलाते हुए घर वापस आगया।
메타데이터
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