काम के दौरान कुछ नया सोचें, कई बार छोटे बदलाव भी जादू कर जाते हैं
पहचान बनानी है, तो अपने काम के प्रति पूरी ईमानदारी रखें
काम के दौरान कुछ नया सोचें, कई बार छोटे बदलाव भी जादू कर जाते हैं
पहचान बनानी है, तो अपने काम के प्रति पूरी ईमानदारी रखें
मेरे लिए किसी भी काम या प्रोजेक्ट का बड़ा होना कोई दबाव नहीं है। यह एक मौका है… खुद को बेहतर करने का। बड़ा सोचना, नए तरीके से सोचना… यही आपको आगे बढ़ाता है। यह जरूरी नहीं है कि आप हर बार बिल्कुल अलग-अलग तरह के प्रयोग करें, लेकिन सही संतुल संतुलन बनाना भी एक चुनौती ही है। है। मेहनत करते रहें, सीखते रहें और सबसे जरूरी…. री… अपने काम के प्रति पूरी तरह ईमानदार रहें। इस दुनिया में पहचान वही बनाता है, जो खुद को हर बार नया साबित करता है।
जब मुझे पुष्पा 2 में ‘जात्रा’ वाला सीक्वेंस पहली बार बताया गया, तो मैं डर गया था। हम एक दमदार फोटोशूट खत्म करके आए थे और अचानक मुझसे कहा गया… ये काम नहीं कर रहा। अब तुम्हें साड़ी पहनना होगी, महिला की तरह तैयार होना होगा। आप सोच सकते हैं, एक एक्टर के लिए यह कितना बड़ा बदलाव हैं। हमने इसे एक्सप्लोर करना शुरू किया। धीरे-धीरे समझ आया कि यही इस किरदार की खासियत बनने वाला है, यही यूएसपी होगा। मैंने महसूस किया कि यह मेरे लिए एक चुनौती है। अगर मैं इसे सही तरीके से कर पाया, तो मुझे अलग पहचान मिलेगी। लेकिन एक बात पर हम बहुत स्पष्ट थे… चाहे मैं साड़ी पहनूं, मेरा मैचो अंदाज, मेरी अल्फा पर्सनैलिटी खत्म नहीं होनी चाहिए। हमने इस किरदार के लिए तीन-चार लुक टेस्ट किए। हर बार कुछ कमी रहती। हम रुकते, सोचते, फिर कोशिश करते। तीसरी बार हम करीब पहुंचे, लेकिन कुछ कमी थी। चौथी बार हमने उसे पकड़ लिया और वहीं से असली काम शुरू हुआ। आप कुछ बड़ा करना चाहते हैं, तो डर से मत भागिए। यही डर आपको आगे ले जाएगा। एक अच्छा परफॉर्मेंस अकेले नहीं बनता। यह टीम वर्क है। मैं निर्देशक के साथ मिलकर काम करता हूं। अपने विचार देता हूं और वह मुझे दिशा देते हैं। हम एक-दूसरे को मदद देते हैं और टीम में यह बहुत जरूरी है। मैं कभी भी अपने काम को सिर्फ अपने हिस्से तक सीमित नहीं रखता। कॉस्ट्यूम हो, मेकअप हो, साउंड हो… हर चीज में शामिल रहता है। रिसर्च करता हूं, हर डिपार्टमेंट के साथ बात करता हूं। क्योंकि में मानता हूं कि एक किरदार को जीवंत बनाने के लिए हर छोटी चीज मायने रखती है। किसी भी काम को बेहतर बनाना है, तो छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखें… यह कमाल का असर दिखाएंगी।
मैं हर सीन को रात में सोने से पहले पढ़ता हूं। फिर जब सुबह उठता हूं तो वह दिमाग में बैठा होता है। नींद जरूरी है, क्योंकि उसी दौरान दिमाग काम करता है सुबह जब शूट के लिए जाता हूं, तो मेरे पास उस सीन के कई नए आइडिया होते हैं। में निर्देशक के साथ बैठकर उन पर चर्चा करता हैं। सभी आइडिया रिजेक्ट हो जाएं… कोई दिक्कत नहीं। फिल्म का असली कप्तान निर्देशक ही होता है। आपको अपने लीडर पर पूरी तरह यकीन करना है।
मैं हमेशा अपने साथ काम करने वालों से कहता हूं कि काम के दौरान आराम न करें। कुछ नया सोचें। कई बार बदलाव भी जादू कर जाते हैं।
newsexpress
메타데이터
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