बोरोधान पर सम्पूर्ण जानकारी: उपयोग, फायदे और नुकसान
बोरोधन एक एशियाई अनाज है जो उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में बहुत लोकप्रिय है। इस लेख में आप बोरोधन के उपयोग, फायदे और नुकसान से सम्बंधित…
बोरोधान पर सम्पूर्ण जानकारी: उपयोग, फायदे और नुकसान
बोरोधन एक एशियाई अनाज है जो उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में बहुत लोकप्रिय है। इस लेख में आप बोरोधन के उपयोग, फायदे और नुकसान से सम्बंधित सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
निचले बरसाती क्षेत्र में सामान्य रूप से खरीफ एवं रबी की फसले के लिए उपयोगी नहीं होती है | इस तरह के क्षेत्रो में 3200 हेक्टेयर पूर्वी और भारत के उत्तर प्रदेश के बलिया , गोरखपुर , देवरिया ,बस्ती, सिद्धार्थनगर ,वाराणसी, मिर्जापुर ,एवं इन जनपदों में अभी भी बोरोधान की खेती की जाती है और इस भूमि पर आज भी समुचित सश्य प्रबंधन प्रभावी और अधिक उपजाऊ प्रजातियां जिससे कृषको को लाभकारी प्रोत्साहन के कमी होने से उत्पादकता बहुत कम हो पति है | इसलिए बोरोधान की प्रजातियां उपलब्ध होने और जानकारी होने के बाद लोगो ने (जाना की बोरोधान की उत्पादकता ज्यादा हो सकती है )जिसके साथ में इसमें प्रचुर मात्रा में नमी पायी जाती है ,और इसलिए बोरोधान की खेती में रोग , कीट , और मौसमी महीना के कारण खरपतवार की न्यूनतम संभावना के कारण सामान्य धान की खेती में बोरोधान की खेती यहाँ पर 40 -से 50 प्रतिसत तक उपज बढ़ा देता है |जिससे जलभराव वाले क्षेत्र के किसान भाई को ज्यादा उत्पादन से लाभ होता है और चेहरे पर ख़ुशी नजर अति है |
और इसप्रकार किसानो के प्रयोजन से उपयोग फसल के कुल आच्छादन क्षेत्र में वृध्दि एवं कृषि और कृषको को बेकार समय का सही उपयोग होने से कृषि में लाभ और उपादकता ज्यादा का फायदा मिलता है | आज कल भी सरजू-52 , साकेत -4 , जया, आई आर-8 ,की खेती किसान भाइयो द्वारा बोरोधान की खेती के रूप में की जाती है |

उपयोगी भूमि (khet)
उपयोगी भूमि (khet) :वर्षाऋतू (बरसात)में अधिक जल भराव में अधिक रूप से तालाब और झील के पास वाले area जिसमे आप को वर्षा के समाप्त होने के बाद टेम्प्रेचर घटकर अधिक 30cm रह पता है | आपको जब और कही जया जल भराव और बड़ी बड़ी झीलों के पास जिसमे जल का ढहराव अधिक होता वो भूमि बोरोधान की खेती के लिए अधिक उपयुक्त होती है | बोरोधान से सम्बंधित कुछ जानकारी निम्न है – बीज दर :-40 — से 45 kg बीज /हेक्टेयर के अनुमान से पौध लगाना चाहिए | पौध डालने का समय : मध्य यानि 15 अक्टूबर से 15 नवंबर का समय उपयोगी होता है | रोपाई का समय :-एक महीना से अधिक दो महीने से कम समय का उपयोग करना चाहिए , जिससे अधिक उपज प्राप्त होती है | पौध प्रबंधन : विधि निम्न है –
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१.बोरोधान के लिए पौध की रोपाई (ropayi) किये जाने का क्षेत्र(Area) के पास का तराई क्षेत्र हो जहा पानी की सुविधा हो | २.पौध की खेत में हम 1 से 1 .5 kg साड़ी गोबर या कम्पोस्ट खाद का उपयोग प्रति वर्ग मीटर करेंगे | ३.एक हेक्टेयर की रोपाई के लिए पौध क्षेत्रफल 1 /10 हेक्टेयर में 25 kg ,यूरिया, 25 kg और सिंगल सुपर फास्फेट , २ kg जिंक सल्फेट एवं २० kg म्यूरेटऑफ़ पोटास का पौध लगाने के समय उपयोग करना चाहिए |
메타데이터
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