वक़्त निकल रहा है
वक़्त निकल रहा है, पर मैं अपने आप से निकल नहीं पा रही।
वक़्त निकल रहा है
वक़्त निकल रहा है, पर मैं अपने आप से निकल नहीं पा रही।
Photo by Aron Visuals on Unsplash
वक़्त निकल रहा है, पर मैं अपने आप से निकल नहीं पा रही।
कुछ ग़म हैं जिन्हें भूलना है, कुछ अधूरे ख़्वाब हैं जिन्हें छोड़ना है।
कुछ आदतें हैं जिन्हें बदल नहीं पा रही, कुछ बातें हैं जिन्हें समझ नहीं पा रही।
ऐसा नहीं है कि कोशिश नहीं कर रही हूँ, खुद से लड़कर कभी हार, कभी जीत रही हूँ।
लेकिन इतना आसान नहीं होता आगे बढ़ना, नया बनने के लिए अपने पुराने हिस्से को रोज़ छोड़ना ।
बदल रहे हैं मौसम, और चिड़ियाँ दूर जा रही हैं। वक़्त निकल रहा है, पर मैं अपने आप से निकल नहीं पा रही।
메타데이터
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