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पुरुषोत्तम मास क्या है? महत्व, कथा और आध्यात्मिक लाभ

पुरुषोत्तम मास क्या है? महत्व, कथा और आध्यात्मिक लाभ

Bhanu Priya · 2026-05-22 07:30 · 0 claps · 5.9 min read
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पुरुषोत्तम मास क्या है? महत्व, कथा और आध्यात्मिक लाभ

पुरुषोत्तम मास क्या है? महत्व, कथा और आध्यात्मिक लाभ

पुरुषोत्तम मास हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और शुभ महीना माना जाता है। इसे अधिक मास या मल मास भी कहा जाता है। यह महीना भगवान विष्णु को समर्पित होता है, जिन्हें पुरुषोत्तम भगवान कहा जाता है।

मान्यता है कि इस महीने में पूजा, व्रत, दान और भक्ति करने से कई गुना अधिक पुण्य प्राप्त होता है। साथ ही, यह समय आत्मिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति के लिए बेहद खास माना जाता है।

इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि पुरुषोत्तम मास क्या है, इसका महत्व क्या है, इसकी कथा क्या है और इस दौरान कौन-कौन से धार्मिक कार्य करने चाहिए।

Purushottam Maas

Purushottam Maas

पुरुषोत्तम मास क्या है?

हिंदू पंचांग में हर लगभग 32 महीने बाद एक अतिरिक्त महीना आता है। इसी अतिरिक्त महीने को अधिक मास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है।

“पुरुषोत्तम” शब्द का अर्थ है “सर्वश्रेष्ठ पुरुष” यानी भगवान विष्णु।

यह पूरा महीना भगवान विष्णु की भक्ति, पूजा और साधना के लिए समर्पित होता है।

पुरुषोत्तम मास का महत्व

पुरुषोत्तम मास को बेहद पुण्यदायी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस महीने में किए गए अच्छे कर्मों का फल कई गुना बढ़ जाता है।

इस महीने में भक्त:

  • व्रत रखते हैं
  • मंदिर जाते हैं
  • दान-पुण्य करते हैं
  • कथा और भजन सुनते हैं
  • भगवान विष्णु की पूजा करते हैं

इसलिए इसे आत्मशुद्धि और भक्ति का महीना भी कहा जाता है।

पुरुषोत्तम मास की पौराणिक कथा

पुराणों के अनुसार एक समय ऐसा था जब अधिक मास को कोई महत्व नहीं दिया जाता था। लोग उसे “मल मास” कहकर अपमानित करते थे।

दुखी होकर वह महीना भगवान विष्णु के पास गया और अपनी पीड़ा बताई।

भगवान विष्णु ने उस महीने को अपना नाम दिया और कहा कि अब यह “पुरुषोत्तम मास” कहलाएगा। उन्होंने यह भी वरदान दिया कि जो भक्त इस महीने में सच्चे मन से पूजा करेगा, उसे विशेष पुण्य और आशीर्वाद प्राप्त होगा।

तभी से पुरुषोत्तम मास को अत्यंत पवित्र माना जाने लगा।

Adhik Maas ki bhagwan Vishnu Ji se Prathna

Adhik Maas ki bhagwan Vishnu Ji se Prathna

पुरुषोत्तम मास में क्या करें?

यह महीना भक्ति और साधना के लिए सबसे उत्तम माना जाता है।

इस दौरान ये कार्य जरूर करें:

  • प्रतिदिन भगवान विष्णु की पूजा करें
  • सुबह जल्दी उठें
  • गीता पाठ करें
  • विष्णु सहस्रनाम का जाप करें
  • गरीबों को दान दें
  • सत्संग और भजन में भाग लें
  • मंदिर दर्शन करें

Adhik Maas Niyam

Adhik Maas Niyam

पुरुषोत्तम मास में कौन से मंत्र बोलें?

इस महीने में भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप बहुत शुभ माना जाता है।

प्रमुख मंत्र:

  • ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
  • ॐ विष्णवे नमः
  • हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे

पुरुषोत्तम मास के आध्यात्मिक लाभ

पुरुषोत्तम मास केवल धार्मिक नहीं बल्कि आध्यात्मिक रूप से भी बहुत महत्वपूर्ण है।

इस महीने के लाभ:

  • मन को शांति मिलती है
  • नकारात्मकता दूर होती है
  • पापों से मुक्ति मिलती है
  • घर में सुख-समृद्धि आती है
  • भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है
  • आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ती है

Adhik Maas Niyam

Adhik Maas Niyam

पुरुषोत्तम मास में क्या नहीं करना चाहिए?

इस पवित्र महीने में कुछ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है।

इन बातों का ध्यान रखें:

  • क्रोध न करें
  • झूठ और छल से बचें
  • मांसाहार और शराब का सेवन न करें
  • किसी का अपमान न करें
  • गलत विचारों से दूर रहें

पुरुषोत्तम मास में तीर्थ यात्रा का महत्व

पुरुषोत्तम मास में तीर्थ यात्रा करना बेहद शुभ माना जाता है। इस दौरान भक्त कई पवित्र स्थानों के दर्शन करते हैं।

प्रमुख धार्मिक स्थल:

  • मथुरा
  • वृंदावन
  • हरिद्वार
  • ऋषिकेश
  • जगन्नाथ मंदिर
  • द्वारकाधीश मंदिर

आप धार्मिक यात्रा की योजना Tirtha Darshan Official Website पर जाकर बना सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए क्लिक करें Temples to Visit During Purushottam Maas in India

निष्कर्ष

पुरुषोत्तम मास भगवान भगवान विष्णु की कृपा पाने का विशेष अवसर है। यह महीना भक्ति, साधना, दान और आत्मशुद्धि के लिए सबसे उत्तम माना जाता है।

यदि आप जीवन में शांति, सकारात्मकता और आध्यात्मिक उन्नति चाहते हैं, तो पुरुषोत्तम मास में पूजा-पाठ और धार्मिक कार्य अवश्य करें।

धार्मिक यात्रा और तीर्थ दर्शन से जुड़ी जानकारी के लिए विजिट करें:

Tirtha Darshan

पुरुषोत्तम मास क्या है? महत्व, कथा और आध्यात्मिक लाभ

पुरुषोत्तम मास क्या है? महत्व, कथा और आध्यात्मिक लाभ

FAQs — पुरुषोत्तम मास से जुड़े सवाल

1. अधिक मास क्या होता है?

अधिक मास हिंदू पंचांग का एक अतिरिक्त महीना होता है, जो लगभग हर 32 महीने बाद आता है। इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है।

2. पुरुषोत्तम मास क्यों मनाया जाता है?

यह महीना भगवान विष्णु को समर्पित है। मान्यता है कि इस दौरान पूजा-पाठ और दान करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है।

3.अधिक मास में कौन से शुभ कार्य नहीं किए जाते?

अधिक मास में आमतौर पर विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और नई शुरुआत जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते।

4. क्या अधिक मास अशुभ होता है?

नहीं, अधिक मास अशुभ नहीं होता। यह आध्यात्मिक साधना, पूजा और भक्ति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

5.अधिक मास में किस भगवान की पूजा करनी चाहिए?

इस महीने में मुख्य रूप से भगवान विष्णु की पूजा की जाती है।

6. पुरुषोत्तम मास में कौन सा व्रत करना चाहिए?

भक्त एकादशी व्रत, पुरुषोत्तम मास व्रत और विष्णु पूजा से जुड़े व्रत रखते हैं।

7. अधिक मास में क्या दान करना चाहिए?

अन्न, वस्त्र, गौ सेवा, धार्मिक पुस्तकें और जरूरतमंदों को भोजन दान करना शुभ माना जाता है।

8.क्या अधिक मास में बाल कटवाना चाहिए?

कई लोग धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिक मास में बाल और नाखून कटवाने से बचते हैं।

9.अधिक मास में कौन सा पाठ करना चाहिए?

इस दौरान:

  • भगवद गीता
  • विष्णु सहस्रनाम
  • रामचरितमानस
  • श्रीमद्भागवत कथा

का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

10. क्या अधिक मास में घर खरीद सकते हैं?

परंपरागत मान्यताओं के अनुसार अधिक मास में नई संपत्ति खरीदने से कई लोग बचते हैं। हालांकि धार्मिक कार्य करना शुभ माना जाता है।

11. अधिक मास में क्या खाना चाहिए?

सात्विक भोजन करना चाहिए। फल, दूध, दही और शुद्ध शाकाहारी भोजन को प्राथमिकता दी जाती है।

12. क्या अधिक मास में नॉनवेज खाना चाहिए?

नहीं, इस महीने में मांसाहार और शराब से दूर रहने की सलाह दी जाती है।

13. पुरुषोत्तम मास में कौन सा मंत्र जपना चाहिए?

सबसे लोकप्रिय मंत्र हैं:

  • ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
  • ॐ विष्णवे नमः
  • हरे कृष्ण महामंत्र

14. अधिक मास में कौन-कौन से नियम पालन करने चाहिए?

  • ब्रह्म मुहूर्त में उठें
  • रोज पूजा करें
  • क्रोध से बचें
  • दान करें
  • मंदिर जाएं
  • भजन और सत्संग करें

15. क्या अधिक मास में यात्रा करना शुभ होता है?

धार्मिक यात्रा और तीर्थ दर्शन करना अत्यंत शुभ माना जाता है, खासकर मथुरा, वृंदावन और हरिद्वार जैसे पवित्र स्थलों की यात्रा।

16. अधिक मास में कौन सा दान सबसे श्रेष्ठ माना जाता है?

अन्नदान, गौदान और गरीबों को भोजन कराना सबसे श्रेष्ठ माना जाता है।

17. क्या महिलाएं अधिक मास का व्रत रख सकती हैं?

हाँ, महिलाएं भी पुरुषोत्तम मास का व्रत और पूजा कर सकती हैं।

18. अधिक मास में तुलसी पूजा का क्या महत्व है?

तुलसी पूजा को भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त करने का माध्यम माना जाता है।

19. अधिक मास में कौन सी कथा सुननी चाहिए?

पुरुषोत्तम मास कथा, श्रीमद्भागवत कथा और भगवान विष्णु की कथाएं सुनना शुभ माना जाता है।

20. क्या अधिक मास में भगवान विष्णु की पूजा से मनोकामना पूरी होती है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सच्चे मन से की गई पूजा और भक्ति से भगवान विष्णु भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

21. अधिक मास में कौन-कौन से तीर्थ सबसे प्रसिद्ध हैं?

प्रमुख तीर्थ स्थल:

  • मथुरा
  • वृंदावन
  • हरिद्वार
  • ऋषिकेश
  • जगन्नाथ मंदिर
  • द्वारकाधीश मंदिर

22. अधिक मास में पूजा करने का सही समय क्या है?

सुबह ब्रह्म मुहूर्त और शाम की संध्या पूजा को सबसे शुभ माना जाता है।

23. क्या अधिक मास में हवन करना शुभ होता है?

हाँ, हवन, जाप और यज्ञ करने से सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं।

24. अधिक मास में कौन सा रंग पहनना शुभ माना जाता है?

पीला, सफेद और हल्के रंग भगवान विष्णु को प्रिय माने जाते हैं।

25. क्या अधिक मास में मंदिर जाना जरूरी है?

जरूरी नहीं, लेकिन मंदिर दर्शन और सत्संग करने से आध्यात्मिक लाभ बढ़ता है।


메타데이터
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