← Back to list

Barish

एक श्याम बच्चों के लिए बहुत सारी खरीदारी करने के बाद , अनीता बस स्टॉप पर, बहुत से बैग लिए बस का इंतज़ार कर रही थी। तभी टटप टटप हिकी बाटरश…

RITU GOEL · 2025-07-15 09:25 · 0 claps · 1.9 min read
#barish
Open on Medium ↗

Barish

एक श्याम बच्चों के लिए बहुत सारी खरीदारी करने के बाद , अनीता बस स्टॉप पर, बहुत से बैग लिए बस का इंतज़ार कर रही थी। तभी टटप टटप हिकी बाटरश भी शुरू हो गयी। बैग सँभािने में भी उसे थोड़ी परेशानी हो रही थी और ऊपर से बाटरश ! बस जो आयी खचा खच भरी थी, अब ददन लिपने को था और मौसम भी बाटरश का , बस में चढ़ने के अिावा कोई और चारा नहीं था। धका मुक़ी करते बस के अंदर जैसे तैसे पहुँच ही गयी। तभी एक युवक ने उसकी बैग्स को सँभािने में मदद की। दो-दो लमनट में बस र ुक रही थी, भीड़ उतर भी रही थी और चढ़ भी रही थी। तभी उसी युवक को सीट लमि गयी , और एक सीट उसने अनीता के लिए भी रोक िी। अनीता आराम से बैठ गयी। अब उसने अपनी सुध िी, बैग्स जांचे , अपनी साडी संभािी, अपना मोबाइि / पसस चेक दकया। तभी उसे िगा की वह युवक उसी पर नज़र िगाए ह । उस युवक ने हाथ बढ़ाकर १-२ बैग्स सँभािने की इज़ाज़त सी मांगी। पर अनीता को बहुत ही अजीब सा महसूस हुआ। वो थोड़ी असहज हो गयी और खुद को उसने समेट लिया। उसका स्टॉप आने वािा था , इसलिए वह सीट से उठी, और बस से बहार जाने वािे दरवाजे की तरफ बढ़ने की कोलशश की। भीड़ इतनी थी की धका िगते िगते , बैग्स के साथ, दकसी तरह , कैसे भी अपने स्टॉप पर उत्तर ही गयी। उसने एक ऑटो को आवाज दे रोका। सामान रखा और ऑटो वािे को गाँधी नगर चिने को बोिा, की तभी वह युवक भी उसी ऑटो में न जाने अचानक से कहा से आ बैठा। और बोिा की उसे भी वही जाना है तो क्या वह साथ में आ सकता है। अनीता ने साफ़ मन कर ददया। और उसे उतर जाने को कहा। वह उतर गया , पर ऑटो को पकड़कर रोके रखा। और बोिा दक़ वह उससे लमिना चाहता है , उससे बातें करना चाहता है , वह उसकी तरफ आकर्षसत है। अनीता को कुि समझ नहीं आया , उसने सॉरी कहा , और ऑटो वािे को चिने दक़ लिए आदेश दे ददया, ऑटो वािा भी तेज़ गलत से आगे बढ़ गया। बाटरश भी अचानक तूफ़ान में बदि गयी। ऑटो घर के सामने ही रुकवाई , सामान उतारा और भैया को हृदय से धन्यवाद् ददया। जैसे ऑटो वािे भैया ने आज कुि गित होने से बचा लिया हो और उसकी सुरक्षा की हो। घर पहुंच कर, गीिे कपडे बदिते हुआ , रह रहकर उसे वही सब याद आ रहा था। कुि अजीब िग रहा था , सब सोचकर। वह खुद को शीशे में बार बार ना जाने क्यों देख रही थी? 43 की उम्र में भी कोई नवयुवक उसकी तरफ आकर्षसत हो सकता है ! बस इस ख्याि ने , उसके मन में एक ख़ुशी का एहसास तो करा ही ददया था। उसका मन में एक नया आत्मलवश्वास भर गया था। बाटरश ने इस बार कुि नयी चेतना भर दी थी अनीता के जीवन में।


메타데이터
post_id
d81d9b668eac
slug
barish-d81d9b668eac
url
https://medium.com/@principal.bsps.ind/barish-d81d9b668eac
canonical_url
https://medium.com/@principal.bsps.ind/barish-d81d9b668eac
author_url
https://medium.com/@principal.bsps.ind
status
ok
fetched_at
2026-07-18 23:42:34