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चारागाहों की ज़रूरत पशु पोषण के लिए है:बढ़ती समस्या और संभव हल

इस प्रदेश में चारागाहों पर अतिक्रमण का बढ़ता संकट पशु पोषण में भी घटना हुई है। आज किसान और पशुपालक दोनों ही हरे चारे की कमी का सामना कर रहे…

Shubham Haldhartimes · 2026-04-18 08:55 · 0 claps · 1.6 min read
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चारागाहों की ज़रूरत पशु पोषण के लिए है:बढ़ती समस्या और संभव हल

इस प्रदेश में चारागाहों पर अतिक्रमण का बढ़ता संकट पशु पोषण में भी घटना हुई है। आज किसान और पशुपालक दोनों ही हरे चारे की कमी का सामना कर रहे हैं। एक दूधारू पशु दिन में लगभग 5 किलोग्राम हरे चारे और 15 किलोग्राम सूखे चारे चाहिए, जिसकी लागत 75 से 90 रुपये तक पहुंच जाती है । पशु पोषण का संतुलन ऐसे में किसानों के लिए एक चुनौती हो गया है।

बढ़ती मांग भूसे की भी पशु पोषण संकट को एक बार फिर गहरा कर दिया है। कई उद्योगों द्वारा भूसे की खरीद की वजह से पशुपालकों को उचित चारा नहीं मिल पा रहा है। इससे उनके पशुओं का आरोग्य और दूध उत्पादन में खराबी Haldhar Times की चर्चा में सामने आया कि कुपोषित पशु न केवल कम दूध देते हैं, बल्कि उनकी प्रजनन क्षमता भी प्रभावित होती है।

असंतुलित आहार द्वारा एक प्रकार की समस्याएं असंतुलित

आहार पशु पोषण के कमजोर कारण है,कई समस्याओं का कारण बनता है —

  • दूध का उत्पादन कम होना
  • प्रजनन क्षमता कम होना
  • मिल्क फीवर और कीटोसिस

इसीलिए इस पशु पोषण को सही से देना बेहतरीन महत्व का है जिससे पशु स्वस्थ रहें और उत्पादन बेहतर हो।

चारे की पौष्टिकता कैसे बढ़ावें

चारे की कमी होने वाली हालतियों में भी पशु पोषण को अच्छे से किया जा सकता है

  • दूध मिलाएं और यूरिया घोल का प्रयोग करें
  • खनिज मिश्रण और मिनरल मिक्सचर का प्रयोग करें
  • पेड़ों की पत्तियों को अन्न दे जैसे खजूर, बबूल, नीम,
  • हरे चारे और सूखे चारे को मिला कर कुट्टी बनाकर दें।

ये उपाय पशु आहार को संतुलित रखने में सचमुच मदद करते हैं और इससे उनकी उत्पादकता भी बेहतर होती है।

अब बात करते हैं चारे की समस्या की। इससे पार पाने के लिए कुछ ठोस कदम उठाने ही पड़ेंगे —

  • चारागाह पर जो भी कब्जा हो गया है, उसे हटाना होगा।
  • किसानों को मिलकर समूह में चारा उगाना चाहिए, ताकि अकेले किसी पर ज्यादा बोझ न पड़े।
  • गांव में चारा डिपो बनाए जाएँ, जिससे जरूरत के वक्त आसानी से चारा मिल सके।
  • गौशालाओं को आगे बढ़ने का मौका मिले, इसके लिए उन्हें प्रोत्साहन देना जरूरी है।
  • मनरेगा जैसी योजनाओं में भी चारा उत्पादन को जगह मिलनी चाहिए, तब जाकर ये समस्या कम होगी।

메타데이터
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