GA Gagandeep Singh Bharara इक आम इंसान ना ख्वाब बुलंदियों को पाने के हैैं, ना चाह आसमां को छूने की हैैं, इरादा है तो बस इतना… दिलों में ऐब नहीं, ज़ुबान पे मैल नहीं, जज़्बातों की कुछ कमी नहीं, इक छोटा सा है, बस इसका बसेरा।