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भगवान स्वामिनारायण: वचनामृत के दर्पण में एक दिव्य व्यक्तित्व

जब शब्द किसी के मुख से निकलते हैं, तो वे उस व्यक्ति की आत्मा का दर्पण बन जाते हैं। संस्कृत का एक सुभाषित कहता है — “यदा-यदा मुञ्चति वाक्य…

भगवान स्वामिनारायण: वचनामृत के दर्पण में एक दिव्य व्यक्तित्व

ब्राह्मी स्थिति का जीवंत स्वरूप : परम पूज्य प्रमुखस्वामी महाराज

भगवद्गीता के दूसरे अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को जिस “ब्राह्मी स्थिति” की बात बताते हैं, वह कोई किताबी सिद्धांत नहीं,

ब्राह्मी स्थिति का जीवंत स्वरूप : परम पूज्य प्रमुखस्वामी महाराज